संगीत (कविता)

एक प्राण में सभी प्राण ,
ऐसे है समय हुएें।
एक सुरभि में जैसे ,
सभी पुष्प महकाए हुएें।
रूप हों अनेक किन्तु ,
मूरत तो एक ही हैें।
मिलाये जो भावों को भावों से ,
वो ह्रदय तो एक ही हें।
एक तार से कैसे ,
बज उठते हैं अनेक तार ?
संवेदनाओं में क्यों ,
होने लगती है झंकार ?
कैसे जीवन का प्रतिबिम्ब ,
कलाकार की कला में होता है साकार ?
जैसे वही हो हमारी चेतनाओं का ,
मूक ,निशब्द या सुप्त आधार।
एक शुद्ध व् शाश्वत संगीत में ,
होता है निसंदेह ऐसा सम्मोहन।
परमात्मा से जोड़ देता है ,
जो हमारा अंतर्मन ।

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