Jun 21, 2018 · दोहे
Reading time: 1 minute

संकट मे है जान

बड़ों बुजुर्गों से मिला, भूल गए सब ज्ञान ।
गायब हैं संस्कार भी, संकट मे है जान ।।

संकट में है जान पर , होना नहीं निराश ।
बनकर पतझड़ में खिलो, सुंदर पुष्प पलाश ।।

संकट में हो जान या, सम्मुख हो यमराज I
जिंदा दिल हर मर्ज का , लेते ढूंढ इलाज II
रमेश शर्मा

1 Like · 38 Views
Copy link to share
RAMESH SHARMA
509 Posts · 42.8k Views
Follow 22 Followers
दोहे की दो पंक्तियाँ, करती प्रखर प्रहार ! फीकी जिसके सामने, तलवारों की धार! !... View full profile
You may also like: