श्री सीता सप्तशती

।।जय श्री राम‌ ।।
—-००0००—
*श्री सीता सप्तशती*
(काव्य-कथा)
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*एकादश सोपान*
{ सीता का वन प्रवास एवम् कुश-लव जन्म}
गतांक से‌ आगे ….!
अंक- १६८
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भूमि सुता वैदेही हैं माता जगदम्ब भवानी ।
नारी के संघर्षों की गाथा है सिया कहानी ।।
*
पालन करने लगी सुतों को ,नित स्नान कराये,
छोटी-छोटी धोती बाँधे, देखे अति हरषाये,
दूध कटोरा भर कर दे, बहला कर उन्हें पिलाये,
कंघी कर बालों की सुंदर, वेणी सिया बनाये ,
घोड़ा, तोता, मोर खिलौना, बना खिलाये रानी ।
नारी के संघर्षों की गाथा है सिया कहानी ।।२६
*
करने लगी काम अपने भर, जेघर सिर धर लाये,
कुटिया को अपने हाथों से ,लीपे गोबर लाये,
गोबर को लेकर के उपले थापे गोल बनाये,
चुने लकड़ियाँ सूखी वन से, सीता शीश उठाये,
अविरल धारा बहे नदी की, बहा अपरिमित पानी ।
नारी के संघर्षों की गाथा है सिया कहानी ।।२७
*
ओरे चक्की ब्रह्म मुहूरत में ,सिय रोज चलाये,
दलिया ,खिचड़ी कभी महेरी, रोटी सेक खिलाये,
दुहे ग‌ऊ को दूध जमाये ,मटकी र‌ई घुमाये,
लौनी के लौंदा उछाल कर ,के नवनीत बनाये ,
सानी करे नहीं अलसाये, किंचित भी महारानी ।
नारी के संघर्षों की गाथा है सिया कहानी ।।२८
*
कूटे धान सिया तो दोनों, आकर हाथ बटायें,
अपने नन्हे हाथों से , मूसल को दोउ उठायें,
उठ नहीं पाये देख मात को,ठिठकें फिर हँस जायें ,
अपनी भोली मुस्कानों से , सिय का मन सरसायें,
मिसरी सी घुल जाय हृदय में, सुने तोतली वानी ।
नारी के संघर्षों की गाथा है सिया कहानी ।।२९
*
सिय के सँग जाकर के तुलसी, पर जल रोज चढ़ायें,
भोर नित्य गुरुवर के चरणों , में जा शीश झुकायें,
सभी ऋषी-मुनियों को दोनों , करके नमन लुभायें,
कबूतरों के पीछे दौड़ें, पकड़ उन्हें नहीं पायें,
ऋषी-पत्नियों को उनकी यह, क्रीड़ा लगे सुहानी ।
नारी के संघर्षों की गाथा है सिया कहानी ।।३०
*
क्रमशः……!
-महेश जैन ‘ज्योति’
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