श्री कृष्ण वन्दना ....

यदु-नन्द नन्दन देवकी-वसुदेव नन्दन वन्दनम् ।
मृदु चपल नयनं चंचलं मन मोहनं अभिनन्दनम् ।।
मस्तक मुकुट पर-मोर कर मुरली मधुर धर मंगलम् ।
तन पीत अम्बर वैजयन्ती कण्ठ कानन कुण्डलम् ।।
गौ ग्वाल गोकुल गोपियाँ जल जमुन गिरि गोवर्धनम् ।
शुचि बाल कौतुक चरित पावन असुर रिपुदल भन्जनम् ।।
स्वर्णिम प्रभा सुषमा सुखदतम् नीलवर्णं सुन्दरम् ।
वह धन्य है बृज-भूमि जहाँ कण-कण रमे राधेश्वरम् ।।
उपदेश प्रेरित सजग गीत-ज्ञान अर्जुन केशवम् ।
अवतार जगदाधार नव उत्थान सन्त सनातननम् ।।
कुरुक्षेत्र सारथि पार्थ नायक महाभारत श्रेष्ठतम् ।
सर्वत्र तुम ही विराट हो सर्वज्ञ भी अति सूक्ष्मतम् ।।
क्षिति शेष पद्मा पद्म कर गद शंख चक्र सुदर्शनम् ।
मति भ्रमित भौतिक भोग भव अनुरक्त मन कामायनम् ।।
चिर भक्ति सर्व समर्पितं उद्घोष जय जगदीश्वरम् ।
प्रति स्वाँस हृदय सुवास हो दृग दर्श हे!करुणाकरम् ।।
मम् मुदित मन-मन्दिर बसो हे!सतत् श्यामा श्यामलम् ।।
सद्बुद्धि सद्गति प्राप्य हो उद्धार भक्त सुवत्सलम् ।
योगेश्वरं सर्वेश्वरं राधेरमण ब्रजभूषणम् ।
हे!माधवं मधुसूदनं जय जयति जय नारायणम् ।

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