.... श्री कृष्ण वंदना ...

…… श्री कृष्ण वन्दना….

यदु- नन्द नन्दन देवकी- वसुदेव नन्दन वन्दनम् ।
मृदु चपल नयननम् चंचलम् मनमोहनम् अभिनन्दनम् ।।
मस्तक मुकुट पर- मोर , कर मुरली मधुर धर मंगलम् ।
तन पीत अम्बर वैजयन्ती कण्ठ , कर्णम् कुण्डलम् । ।
गौ ग्वाल गोकुल गोपियाँ , जल जमुन गिरि गोवर्धनम् ।
शुचि बाल कौतुक चरित पावन , असुर- रिपु- दल भन्जनम् ।।
स्वर्णिम प्रभा सुषमा सुखदतम् नील वर्णम् सुन्दरम् ।
वह धन्य है बृज- भूमि जहँ कण- कण रमे राधेश्वरम् ।।
कुरुक्षेत्र सारथि- पार्थ नायक महाभारत श्रेष्ठतम् ।
सर्वत्र तुम ही विराट हो सर्वज्ञ भी अति सूक्ष्मतम् ।।
उपदेश प्रेरित सजग गीता- ज्ञान अर्जुन केशवम् ।
अवतार जगदाधार नव उत्थान सन्त सनातनम् ।।
क्षिति शेष पद्मा पद्म कर गद शंख चक्र- सुदर्शनम् ।
मति भ्रमित भौतिक भोग भव अनुरक्त मन कामायनम् ।।
चिर- भक्ति सर्व समर्पितम् उद्घोष जय जगदीश्वरम् ।
प्रति- श्वाँस हृदय सुवास हो दृग- दर्श हे! करुणाकरम् ।।
मम् मुदित मन- मन्दिर बसो हे ! सतत् श्यामा श्यामलम् ।
सद्बुद्धि सद्गति प्राप्य हो उद्धार भक्त- सुवत्सलम् ।।
योगेश्वरम् सर्वेश्वरम् राधेरमण ब्रजभूषणम् ।
हे! माधवम् मधुसूदनम् जय जयति जय नारायणम् ।।

डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ

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