Aug 17, 2016 · मुक्तक
Reading time: 1 minute

“श्रीपति दास”

पति जैसे जीव का भैया,
इस जग में कोई दूसरा सानी नहीं है।
पत्नियों ने इसे आज तक,
अनदेखा किया हक़ीक़तें मानी नहीं है।
खड़ा बगुले सा एक टाँग,
बजाने को मलिकाए आली का आदेश।
अवधूत कभी ख़्वाब में भी,
हुई आदेशों की ना फरमानी नहीं है ।

19 Views
Copy link to share
avadhoot rathore
35 Posts · 1.1k Views
You may also like: