Oct 20, 2017 · कविता
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“श्रीकृष्ण-लीला” और “प्रकृति-संरक्षण”

अपना भी मन तो बहुत करता है,
पेड़ कदम पर बैठ बंशी बजाने का,

आशीर्वाद मिले प्रभु तुम जैसा,
मलहार प्रेम प्यार के गाने का,
.
गोपियों संग रास रचाने का,
प्रभु तुम कर्ता हो मैं अभिव्यक्ति,
.
संदेश तुम्हारे बन जाऊँ,
इतनी सी दृष्टि दे देना,
.
अंधकार दूर हो इस तन-मन के,
इतनी आत्मिक उज्ज्वलता दे देना,
.
*सब कष्ट कटे इस तन-मन के,
गीता का हर योग सिखा देना,
.
विषय-विकार मिटे सब कष्ट कटे,
निजता में रहे निष्ठा हर राज सिखा देना,
.
जीव जीवन में सदा रहे आस्था,
कलियुग की हर छाया से बचा लेना,
.
प्राकृतिक आपदा इन्द्र प्रकोप से बचने को,
गोवर्धन-पर्वत,प्रकृति-संरक्षण का संबोधक पाठ हर गोप-गोपियों डॉ महेंद्र को पढ़ा देना,

डॉ महेन्द्र सिंह खालेटिया,

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Mahender Singh Hans
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