घनाक्षरी · Reading time: 1 minute

श्राद्ध पक्ष

श्राद्ध पक्ष
घनाक्षरी छंद

कभी नहीं जाना हाल जरा ना किया ख्याल
बीमारियां पिताजी को आती रहीं घेर घेर
सेवा कार्य नहीं किया मौका देख भाग लिया
नहीं सहयोग दिया गया मुख फेर फेर
अंत का समयआया आग भी लगा न पाया
ससुराल वालों से मिलाता रहा मेर मेर
व्यंजनों को सानकर आज बाप मानकर
कौवों को खिला रहा है वही पुत्र टेर टेर

गुरू सक्सेना नरसिंहपुर (मध्य प्रदेश)

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