.
Skip to content

श्राद्ध क्यों ?

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

September 13, 2017

जीते जी यदि रखते होते
माता – पिता में श्रद्धा तुम।
तो न दिखाई देते होते,
जगह-जगह पर वृद्धाश्रम।
बाद मृत्यु के जागी आस्था,
कर रहे तर्पण, कर रहे श्राद्ध।
जिन्दा जिनकी सुध न ली कभी,
अब क्यों आई उनकी याद ?
डरते हो क्या यही सोच कर,
इक दिन अपने साथ यही होगा।
जैसी करनी वैसी भरनी है भाई,
जैसा किया फल भी वही भोगा।

—रंजना माथुर दिनांक 13/09/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
Recommended Posts
पितरो का श्राद्ध कर्म
श्राद्ध कर्म क्या है ----- ---------------------- "दीयते यत्‌ , तत्‌ श्राद्धम्‌’ श्राद्ध कर्म" अर्थात वह कर्म जो पितरों की तृप्ति के लिए श्रद्धा और विश्वास से... Read more
श्राद्ध मे
जीते जी माँ बाप को,...नही पिलाया ऩीर! श्राद्ध पक्ष में मे शान से,उन्हे खिलाते खीर !! जिन्दा थे तब तो कभी, लिया न आशीर्वाद !... Read more
श्राद्ध पक्ष मे खीर
जीते जी माँ बाप को,...नही पिलाया ऩीर! श्राद्ध पक्ष में मे शान से,उन्हे खिलाते खीर !! जिन्दा थे तब तो कभी, लिया न आशीर्वाद !... Read more
मंज़िल अपनी जगह रास्ता अपनी जगह है...
मंज़िल अपनी जगह रास्ता अपनी जगह है ज़िंदगी में सफ़र का मज़ा अपनी जगह है मंदिर जाते हो कभी मस्जिद जाते हो इधर उधर न... Read more