कविता · Reading time: 1 minute

श्याम सँग होरी

श्याम सँग सखी खेलत होरी ।
तर भई तन मन श्याम रंग से ,
सुकचत लरजत थोरी थोरी ।
ओढे जो सँसार चुनरिया ,
धर दीनी कोरी की कोरी ।
श्याम सँग सखी खेलत होरी ।
… विवेक दुबे”निश्चल”@…

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