Mar 4, 2019
कविता · Reading time: 1 minute

शौर्य गाथा

उठ जागा वीर सपूतों ने
मुँहतोड़ जवाब दिया
जो कायराना काम किया था कुतो ने ।

हम वीर शहीदों के अमर कहानी हैं
शौर्य-पराक्रम के अमिट निशानी हैं

ओज उत्साह से भरे हुए हम
फिर भी शांति -संदेश फैलाते हैं,
दानवता की पृष्ठभूमि पर
मानवता के परचम लहराते हैं ,

पर नासमझ जो समझ सके न
उसको सबक सिखाते हैं,
चकनाचूर कर देते हैं
दुश्मन के नापाक इरादों को
फिर अपनी शरण में लाते हैं ।

बुलंद इरादों के स्वामी हैं हम
युद्ध के नही कामी हैं हम
सागर सा गहरा
त्याग करुणा से भरा

फिर भी ईंट का बदला पत्थर से लेते हैं
बाज न आए जो अपनी हरकतों से,
उसको जख्म गहरा देते हैं ।

जय हिन्द।
जय जवान ।

साहिल…..

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मेरे मुख से सहसा निकला उदगार मेरी लेखनी बनती है , लोगों की दर्द-पीड़ा मेरी लेखनी की जननी बनती है । (9973343915) +2' शिक्षक ।
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