शौर्य गाथा - वीर कुँवर सिंह

शौर्य गाथा- वीर कुँवर सिंह

भारत के सैकड़ों सेनानियों में
वीर कुँवर सिंह एक सेनानी था ।
लोहा लिया जमकर अँग्रेज़ों का
वीर महान योद्धा तूफानी था ।।

अँग्रेजों से खूब लड़ा वह मर्दाना
गजब की उसकी कहानी थी ।
अस्सी की उम्र में भी युवाओं-सा
उसमें जोश और जवानी थी ।।

गाँव जगदीशपुर जिला भोजपुर
बिहार राज्य का घराना था ।
पिता साहबजादा माता पंचरत्न
कुल – वंश राज – पुताना था ।।

शिक्षा-संग युद्ध-कौशल, घुड़दौड़,
कुश्ती की लालसा पाली थी ।
मरणोपरांत तात के रजवाड़े की
जिम्मेदारी उसने संभाली थी ।।

शंखनाद हुआ था सन् संतावन में
स्वतंत्रता की हवा चली थी ।
वीर कुँवर बाबू की खौफ से मची
अँग्रेजों में बड़ी खलबली थी ।।

जब-जब अँग्रेज – फौजियों के संग
उनकी भिड़ंत हुआ करती थी ।
तब-तब उनको चकमा देते रहते
युद्ध-कला से फौजी डरती थी ।।

लड़ा-लड़ाकर, हरा-हराकर अँग्रेज-
सैनिकों को तब परास्त किया ।
अँग्रेज़ों के हाथों से रजवाड़े छिनके
उनकी मंशा को ध्वस्त किया ।।

गोली खाये बाँये हाथ को काटकर
पलक झपकते अलग किया ।
गंगा मैया के जल-तरंगों पर स्वतः
अपनी बाँह को अर्पण दिया ।।

===××××××====
दिनेश एल० “जैहिंद”
15. 08. 2018

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