कविता · Reading time: 1 minute

शौक है लेखन पर मैं कॉपी-पेस्ट नहीं करता*

*मैं कौन हु ?
क्या मैं चोर हु ?
पर मैं चोरी नहीं करता,

मै लिखता हु
पर कॉपी पेस्ट,
कॉपीराइट नहीं करता,
क्या लिखना है,
तथ्यों पर गौर नहीं करता,
किस पर लिखु ?
कैसे लिखु ?
जो चाहे जैसे चाहे जब चाहे लिख लेता हु,
पर मैं कॉपी-पेस्ट नहीं करता,

हाँ #मेरे अल्फाज़# मेरे नहीं है,
हाँ जरूरत पड़े तो,
आपके है,
किसी और के है,
पर मैं चोर नहीं हु,
कॉपी-पेस्ट नहीं करता,

ज्वलंत घटनाएं है,
विचार-धाराएं है,
राजनीति है,
धर्म कभी नहीं मरता,
मेरा स्वभाव है लिखना,
पर कॉपी-राइट नहीं करता,

अपनी बात सबसे करता हु,
कुछ नहीं छुपाता,
क्योंकि ..उन्हे मैं अपना समझता हु,
लोग धोखा करते है,
धोखे से वो नीचे गिरते है,
मुझे सतर्क करते है,
वे खुद को नहीं,
मुझे परखते है,
इसलिए मैं उनकी नहीं,
मैं अपनी सोचता हु

मैं लिखता हु,
पर कॉपी-पेस्ट नहीं करता,
मेरा कोई कॉपी-राइट नहीं है,
क्योंकि मैं इतना ज्यादा
इतना गहरा नहीं लिखता,

मुझे मेरे परिवार ने,
पढ़ाई ने समाज ने वैद्य के रुप पहचान दी है काफी है,पेट पालने में,शौकीन हु लेखन का,
डॉ महेन्द्र सिंह खालेटिया,
रेवाड़ी(हरियाणा).

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