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शैर

छूकर लवों को यूँ मदहोश कर दिया।
छाया खुमार ऐसा हम न हम रहे।।।।

काश हमारे गीतों को, गर शब्द आपके मिल जाएं ।
महक उठेगा जीवन उपवन,सुर-साज आपके मिल जाएं।।
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तुमने बेबफा कहा जो होता, एक बार भी।
क्यूँ तमाम उम्र, इंतज़ार में गुजारते।।
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हम जिसे दिल मे वसा लेते हैं।
ताउम्र उसे अपनी वफ़ा देते हैं।।
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ये वक्त क्या मिटायेगा हस्ती को हमारी।
जब कौल साथ रहने का हम दे ही चुके हैं।।
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रग रग में समाया हुनर तेरे किरदार में।
तू तो ख़ुदा की शान है,मुझे रहबर बना लिया।।
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बेटा बटवारे का पैदायशी हक़दार है मगर,
दो-दो कुल की लाज निभाती हैं बेटियां।
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इक ईंट क्या रखी हमने जो यूँ नीव में।
लोगों ने इक शहर तामीर ही कर दिया।।
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जिंदगी बस अनुभवों की एक कहानी है ।
मौत ही एक सच है यारो सबको आनी है।।

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अरविन्द राजपूत 'कल्प'
अरविन्द राजपूत 'कल्प'
साईंखेड़ा जिला-नरसिहपुर म.प्र.
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अध्यापक B.Sc., M.A. (English), B.Ed. शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय साईंखेड़ा Books: सम्पादक कल्पतरु - एक पर्यावरणीय...