शैतान रजा

शैतान रजा
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अपने माँ बाप की इकलौती संतान रजा,बचपन से शैतान का मानीटर जैसा था।उसकी शैतानियों से उसके अम्मी अब्बू ही न हीं पूरे गाँववाले, उसके स्कूल के शिक्षक यहांँ तक कि पड़ोसी गाँव तक के लोग हैरान परेशान रहते थे।किसी के घर की कुण्डी बंद कर देना, किसी के जानवर खोल देना,किसी का सामान उठाकर दूसरे के घर पर रख देना,झूठी चुगली करना, स्कूल से गायब हो जाना, रात रात भर घर से गायब रहना, किसी का बिस्तर सहित चारपाई उठाकर बाग,तालाब पर छोड़ आना ,ये सब उसकी दिनचर्या में शामिल था।
हाँ इतना जरूर था कि वो चोर नहीं था और चौदह वर्षीय बच्चा होकर भी सबकी यथा संभव मदद भी करता था।उसकी वजह से कई बार चोरों की भी दाल नहीं गली।
समूचे गाँव में हिंदू मुस्लिम जैसे कोई भेद न था।सब एक दूसरे से घुलमिल कर रहते थे।एक दूसरे के तीज त्योहार सब मिलकर मनाते थे।गाँव के आपसी भाईचारे की मिसाल दूर दूर तक दी जाती थी।
एक दिन पंडित राम लखन की पोती पाँच वर्षीय मुनिया खेलते खेलते कुएँ में गिर गई। संयोग से रजा ने उसे कुएँ में गिरते हुए देख लिया था।उसने चिल्ला चिल्ला कर गाँव भर को सूचित कर दिया।तब तक पंडित जी व दस बारह और लोग भी पहुंच गये।सारे लोग परेशान थे कि क्या किया जाय?
रजा बोला आप लोग बाल्टी को मजबूत रस्सी से बाँध कर डालो।मैं कुँए में जाता हूँ।
जब तक लोग कुछ समझते वो अल्लाह का नाम लेकर कुँए में कूद गया।उसे चोट भी लगी परंतु उसे अपने से ज्यादा मुनिया की फिक्र थी।
मुनिया बेहोश थी,उसे गोद में उठाया और ऊपर की ओर मुँह करके चिल्लाया-जल्दी करो,मुनिया बेहोश है।
रस्सी के सहारे बाल्टी कुँए में डाला गया। रजा ने मुनिया को बाल्टी में बिठाकर अपने गमछे से सावधानी से बाँध दिया।
लोगों ने बाल्टी सहित मुनिया को ऊपर खींच लिया।फिर से रस्सी डालकर रजा को भी बाहर निकाला।
तब तक मुनिया को भी होश आ गया।यह देखकर रजा बहुत खुश हुआ।
पंडित जी ने रजा को गले से लगा लिया।सारा गाँव रजा की तारीफों के पुल बाँध रहा था।
रजा के एक जज्बाती कदम ने मुनिया को बचा लिया।मुनिया की माँ ने
मुनिया के साथ रजा को बाहों में भरकर
ममता की बरसात कर दी।
मुनिया आश्चर्य से देखती रही।
गाँववालों की नजरों में आज रजा की बदमाशियाँ नम आंखों में तिरोहित हो रही थीं।
🖋सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा(उ.प्र.)
8115285921

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