गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

शेर

212-212-212-212
छोड़ दो तुम नशा ज़िन्दगी के लिए
दूध और घी बने आदमी के लिए

मुद्दतों से जो छाया अँधेरा यहाँ
अब जला दो शमां रौशनी के लिए

लाख शुक़राना रब का अदा हम करें
नेमतें कितनी बख़्शी सभी के लिए

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