*** शेर ***

कश्तियां डूबी है बीच मझधार जाकर

हाथ से छूटा अब जो प्यार पतवार मेरे ।।१

नींद मुझको आएगी बोलो इस क़दर

प्यार में भरपेट धोखा जो खाता रहा ।।२

रातभर अहसास उसका स्वप्न मे होता रहा

मैं करवटें बदलता रहा और वो सोता रहा ।।३

? मधुप बैरागी

1 Like · 11 Views
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर...
You may also like: