शेर · Reading time: 1 minute

शेर

(1)

आएगी एक दिन वो मेरे ख़ाबों की मल्लिका
ये सोच कर तमाम उम्र आँखों में गुजार दी

(2)

मैंने उसे दिल और उसने कलम थमा दिया
बड़ी जालिम है मुहब्बत शायर बना दिया

(3)

एक काँटा पाँव से मेरे निकलता ही नही
तीर दूजा दिल को मेरे करने छलनी आ गया

(4)

उल्फ़त में तेरे हमदम दुनिया को भुला देंगे
इक तेरी खुशी खातिर हम खुद को मिटा देंगे

(5)

रक्खे जो क़दम गुलशन में मेरे महबूब ने
खिल उठीं कलियाँ उसके इस्तेकबाल में

(6)

ज़माने की खुशी उसे मयस्सर नही होती
माँ की दुआओं से जो महरूम होता है

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मैं रामस्वरूप उपनाम प्रीतम श्रावस्तवी S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे…
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