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शेर

bunty singh

bunty singh

शेर

November 24, 2016

”शहर में हर शख्स तनहा अनमना बहरा मिला
कोठियाँ सब की अलग सब का जुदा कमरा मिला’
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;;रौनकें ही रौनकें थी आप जब तक थीं वहां
ख्वाब में आया वही मंज़र मुझे वीरां मिला’

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Author
bunty singh
साहित्य एवं संगीत में रूचि की वजह से आपके बीच हूँ .rnजब लिखना ज़रूरी हो जाता है 'तब लिखकर उलझने कम कर लेता हूँ rnदर्द की लोग दाद दिया करते हैं rn=====बंटी सिंह ===========
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