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शेर..

Sangita Goel

Sangita Goel

कविता

August 6, 2016

तसव्वुरात की परछाई उभर आई फिर से

कौन ये अक्स अपना दिखा गया फिर से।

संगीता गोयल
6/8/16

Author
Sangita Goel
मेरी विधा दोहे, कुंडलियाँ, कविता, छंद, हाइकु, गजले, शेर, शायरी,मुक्तक, लघुकथा, कहानी, two liners,, गीत, भक्ति गीत, इत्यादि।।। अपनी गजले गाना मुझे पंसद है। नोएडा,, काफी सारे कार्यक्रम में भाग ले चुकी हूँ।।।। साहित्य से जुड़ी हुई हूँ।।। Facebook पर... Read more
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