शेर · Reading time: 1 minute

शेर

तो यह तुम हो जो हर शाम छत पे चढ़ती हो ‘अर्श’
मै हैरान था यह कौनसा चांद है जो रोज पुरनूर होता है

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I am an assistant teacher in basic education department at Lakhimpur Kheri UP कुछ तो लिखने शौक है मुझे "अर्श" कुछ हालात भी मजबूर करते है।
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