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शूल बिछे हर पथ

हम भूख को तरसे,
आंखों के मेघ बरसे,
खा ले तू मेरे भाई,
मैं हूँ अब तेरी माई,
यह जहां अपना घर,
चले हम अब दर दर,
शूल बिछे यहाँ हर पथ,
कैसा चलेगा जीवन रथ,
सुख दुःख का चक्र यह,
अभी हम लेंगे इसको सह,
।।।।जेपीएल।।।

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जगदीश लववंशी
जगदीश लववंशी
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J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) ,MA (HINDI) & MSC (MATHS) , MA (POLITICAL SCIENCE) "कविता लिखना...