गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

शुक्रिया

बख्शी जो आपने इज्जत,शुक्रिया
बस इतनी ही थी ज़रूरत, शुक्रिया ।
आपकी दुआओं का है असर दोस्तों
हुई मुझको मुझ से मुहब्बत, शुक्रिया ।
रहने दो मुझे अपने साया-ए-दामन में
मिलती है सुकून-ओ-लज्जत, शुक्रिया ।
ए तो बड़ी रहमत -ए-खुदा है दोस्तो
वरना मिलती भी नहीं नफरत,शुक्रिया ।
शुक्रगुजार हूँ मै आपकी कद्र दानी से
मुझको मिल गई थोड़ी शोहरत शुक्रिया ।
-AJAY PRASAD
TGT ENGLISH DAV PS PGC
BIHARSHARIF ,NALANDA

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