Jan 13, 2017 · दोहे
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शीत लहर मे हाल

टूटी-फूटी झोपडी, ठण्डी का आघात !
कैसे कटे गरीब की,बिना रजाई रात !!

क्या होता है ठंड मे,.शीत लहर से हाल !
जिनके सर पर छत नही,उनसे करो सवाल !!

अकड गया पूरा बदन, किट-किट बाजे दांत !
मारे ठण्डी के सभी,..सिकु़ड गई हैं आंत !!

लगे ठिठुरने ठण्ड से ,मुम्बई की जब रात !
क्या होंगे फिर सोचिये ,दिल्ली के हालात !!

देख नजारा ठण्ड का ,चढ़ने लगा बुखार !
कैसे जाऊं गाँव मैं, करता यही विचार !!

थामा ज्यों ही ठण्ड ने,शीत लहर का हाथ !
काया को भाने लगा, कम्बल का त्यों साथ !!

एक हाथ में चाय है, दूजे में अखबार !
मीठी मीठी ठण्ड है, सर्दी का उपहार !!

ठंड भगाने का मुझे,..अच्छा लगा उपाय !
प्याला भर कर पीजिये,अदरक वाली चाय !!
रमेश शर्मा.

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RAMESH SHARMA
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दोहे की दो पंक्तियाँ, करती प्रखर प्रहार ! फीकी जिसके सामने, तलवारों की धार! !... View full profile
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