मुक्तक · Reading time: 1 minute

शिव वंदन

*मुक्तक*
भोले तो निश्छल भावों के प्यासे हैं।
सुमिरन से पावन करने में गंगा से हैं।
भक्तों के शुचि प्रेमामृत की उर्जा से।
बिष पीकर भी रहते अच्छे खासे हैं।
अंकित शर्मा ‘इषुप्रिय’
रामपुर कलाँ,सबलगढ(म.प्र.)

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