शिव वंदना

विधा- तंत्री छंद_

#शिल्प विधान-८,८,६,१०चरणांत२२(वर्णिक)

हे! शिव शंकर,औघरदानी, हे! भोले, शंभू त्रिपुरारी|
हे! महाकाल, कर दो निहाल, है तेरी, सब महिमा न्यारी|

हे! अमरनाथ, केदारनाथ, सोमनाथ, अर्ध चन्द्रधारी|
हे!भूतनाथ, हे!आदिनाथ, प्राणनाथ, शिव संकटहारी|
हे! भीमेश्वर, ओंकारेश्वर, मुक्तेश्वर, कर त्रिशूलधारी|
हे! महाकाल ,कर दो निहाल, है तेरी, सब महिमा न्यारी|

हे! नील कंठ, नागाधिराज, गौरापति, हरिशर विषधारी|
हे! महादेव, हे! वामदेव, अचलेश्वर, भोला भंडारी|
हे! जगतपिता, भोले बाबा, मणिमहेश, शिव डमरूधारी |
हे! महाकाल ,कर दो निहाल, है तेरी, सब महिमा न्यारी|

सिर पर गंगा,बूढ़ा नंगा,हठ योगी, जटाजूटधारी|
हे अभयंकर, श्री नागेश्वर, करते हो, नित बैल सवारी|
तन पर अपने, भस्म-लपेटे, विश्वनाथ, बाघंबर धारी|
हे! महाकाल ,कर दो निहाल, है तेरी, सब महिमा न्यारी|

लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली

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