शिव महिमा

शिव महिमा 🎪 (सार छंद)
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मन चाहा फल देने वाले,
शिव शंकर अविनाशी।
मानव त्रास हरण करते हो,
हे घट – घट के वासी।।
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बसहा की तू करे सवारी,
नीलकंठ विषधारी।
नाग कंठ लिपटाने वाले,
हे भोले भंडारी।।
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तेरी महिमा जान सके जो,
वो है सच्चा ज्ञानी।
शरण हमें भी ले लो भगवन,
हम है मूढ़ अज्ञानी।।
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विष पीकर कल्याण किया था,
देवों का त्रिपुरारी।
हे प्रलयंकर, हे अभयंकर,
नमन तुझे असुरारी।।
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शिव का नाम जपे हर पल जो,
उसका बुरा न होता।
वरदहस्त भोले का जिनपर,
वह नर कभी न रोता।।
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नमन स्वीकारो आज म्हारा,
“सचिन” खड़ा कर जोड़े।
पैदल थारे द्वारे आया,
जुरै न हाथी घोड़े।।
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✍✍पं.संजीव शुक्ल “सचिन”
मुसहरवा (मंशानगर)
पश्चिमी चम्पारण
बिहार

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