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शिव दोहे

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

दोहे

February 26, 2017

द्वादश लिंग बिराजते, पावन तीरथ धाम।
आग नयन विष कंठधर, त्रिपुरारी प्रभु नाम।।

फागुन चौदस रात को,बिल्वपत्र जल हाथ।
पूजा -अर्चन जो किया, पार लगायो नाथ।।

हाथ जोड़ विनती करे, कृपा दृष्टि प्रभु ज्ञान।
देख भक्त अनुराग को,खूब बढ़ायो मान।।

आए हैं बारात ले, भस्मी तन पर साज।
भूत प्रेत सँग राजते,स्वागत नगरी आज।।

काशी शिव नगरी प्रभू, विनय करे बहु बार।
पीर पड़ी है भक्त पर,आ जाओ इक बार।।

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”

Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more
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