Dec 10, 2016 · कविता
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शिवराज

नमो नमो की दौड़ में भूले सब चौहान ।
मामा बनकर दिया सहारा किया गरीब का मान ।

म. प्र. की सत्ता में जब आऐ श्री चौहान ।
विश्व पटल पर बड़ गई तबसे म. प्र. की शान ।

११ वर्षों में इन्होंने देखो बना दिया इतिहास ।
गरीबी और अशिक्षा का कर दिया पूर्णतः नाश ।

सूखा हो या कोई आपदा थामा किसान का हाथ ।
लाभ बराबर दिया मुआवजा हर कोई बोले एकसाथ ।

कहा उन्होंने कुआं खेत में और तालाब हर गांव बने ।
तबसे देखो घर किसान के और देखो जँगल घने ।

किसान कर्मठ जीतकर सौंप दिया उसे किसान को ।
सारी दुनिया ने तब जाना म. प्र. की शान को ।

जब बारी आई थी करने की सिंहस्थ का आयोजन ।
शांति पूर्ण सम्पूर्ण व्यवस्था किया सभी का अभिनंदन ।

जब एमपी पर कलंक भ्रूणहत्या का हल था खोजना ।
मामा बनकर लाऐ साथ वो लाडली लक्ष्मी योजना ।

कई घटनाऐं और दुर्घटनाऐं होने से अब तो टली ।
जबसे सौ और १०८ की गाड़ी मिनटों में चली ।

पहली बार युवा प्रतिभा को था किसीने आजमाया ।
लौन दिलाकर प्रतिभाओं शान से जीना सिखलाया ।

शिक्षा खेल विज्ञान में नहीं किसीसे पीछे हम ।
आई आई टी इंजीनियरिंग ने एमपी में फैलाऐ कदम ।

मोदी जी ने लाल किले से स्वच्छता की हुंकार भरी ।
म. प्र. ने सबसे ज्यादा शौचालय निर्माण करी ।

वाजपेयी और मोदी जी के सपनों को दिया नया आकार ।
स्वर्णिम म. प्र. बना कर दिया सपना साकार ।

हर गरीब का हो अवास १ रुपये में दिया अनाज ।
हर गरीब बोले सुनलो दुनियावालो आज ।

यही तो है हमारा स्वाराज!
यही तो है हमारा शिवराज!

१प्रश्न औचित्य बना अब तक मेरे मन में यार!
क्या खत्म हो चुका यहाँ से रोग ये भ्रष्टाचार ।

मेरी यह बेतुकी कविता गर पहुंचेगी उनके द्वार ।
तभी मैं मानूँ इस शिवयुग से खत्म हो चुका भ्रष्टाचार ।

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Govind Kurmi
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