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शिक्षा समाज का दर्पण

sunil nagar

sunil nagar

गज़ल/गीतिका

November 8, 2017

शिक्षा समाज का दर्पण है ,
जीवन मेरा सब अर्पण है ।

जीना जिंदगी सिखाता जो ,
करो विद्यालय पदार्पण है ।

बर्बाद समय मत करना ,
उपयोग करना हर क्षण है ।

शिक्षा का ध्येय यह रखना,
सद् चरित्र करो निर्माण है ।

विनयशील बनाना जीवन को,
दयाशील ह्रदय, नही पाषाण है ।

दीन – दुखी की सेवा करके ,
करना सबका परित्राण है ।

कर भला हर एक मानव का ,
“सुनील” जब तक प्राण है ।

रचनाकार – सुनील नागर
खुजनेर – राजगढ़ ( म. प्र.)

Author
sunil nagar
सुनील नागर खुजनेर राजगढ़ ( म. प्र.) एम. ए . - हिन्दी कार्य - अध्यापक हिन्दी , संस्कृत
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