Sep 5, 2017 · दोहे

शिक्षक दिवस पर दोहे रमेश के

गुरु दिखलाये राह जब ,मिले नसीहत ज्ञान !
खिले उन्ही की सीख से, जीवन का उद्यान !!

शिक्षक का होता नहीं, खत्म कभी टेलेन्ट !
और न शिक्षा से कभी, मिले रिटायरमेंट !!

जाने कैसा दौर है, रही नहीं अब शर्म !
गुरु चेला दोनों यहाँ ,. भूले अपना धर्म !!

मुश्किल है इस दौर में,…. मानव की पहचान !
सद्गुरु पाना किस तरह, होगा फिर आसान !!
रमेश शर्मा

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दोहे की दो पंक्तियाँ, करती प्रखर प्रहार ! फीकी जिसके सामने, तलवारों की धार! !...
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