कुण्डलिया · Reading time: 1 minute

शिक्षक के सम्मान को

(1)
शिक्षक के सम्मान को, पहुँचाये जो चोट।
उस नेता के पक्ष में , कभी न करना वोट।

कभी न करना वोट, खोंट राजा में भारी।
करता लूट खसोट, प्रजा रोये बेचारी।

कह संजय कविराय, बना रक्षक ही भक्षक।
बचे कौन समुदाय, यहाँ जब बचा न शिक्षक।

(2)

कहिए द्विज शिक्षक गुरू, या कहिए उस्ताद।
परमेश्वर भी पूजिए , गुरु -पूजा के बाद ।

गुरुपूजा के बाद , स्वाद देगी हर पूजा।
हर लेते अवसाद, न गुरु ते गुरुतर दूजा।

कह संजय यह बात, ध्यान से मन में गहिए।
खाकर गुरु की लात, धन्य जीवन को कहिए।

संजय नारायण

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