कविता · Reading time: 1 minute

शिक्षक का चरित्र बदल गया

शिक्षक का चरित्र बदल गया
शिक्षण था पवित्र बदल गया

शिक्षण-कारज जो था जनूनी
व्यवसायीकरण में बदल गया

उसूलन-गिरफ़्त में था शिक्षक
मुक्त हो बेउसूल में बदल गया

शिक्षण शिक्षक का था कार्य
गैरशैक्षिक कार्य में बदल गया

चमचागिरी की हद तो देखिए
गुरु अफसरी में है बदल गया

कमीशन ईधर-उधर बांट कर
शिक्षण दलाली में बदल गया

बी.एल.ओ जैसे कार्य करता
शिक्षक पटवारी में बदल गया

मिड डे मील प्रभारी बन कर
शिक्षक भंडारी में बदल गया

कभी ईधर-उधर, कशमकश
शिक्षक मदारी में बदल गया

बदलती शिक्षा की नीतियों में
नीति आभारी में बदल गया

कार्यालयों के चक्कर काटता
शिक्षक है लंपट में बदल गया

बीमार बच्चों का कर ईलाज
चिकित्सक में देख बदल गया

दफ्तरों की पूजा करता हुआ
शिक्षक पुजारी में बदल गया

मूल कार्यों से भटक कर वह
अब व्यापारियों में बदल गया

ओनलाइन चक्रव्यूह में फंसा
वह नेटधारी में है बदल गया

नीतिकार की नीतियों में फंस
अहेरी के अहेर में बदल गया

अधिकारी से डरा- सहमा सा
शिक्षक से भीरु में बदल गया

शाम तक थक हार घर पंहुच
पत्नी के पति में है बदल गया

सभी की खुशियाँ पूरी करता
निज की खुशियाँ हैं भूल गया

-सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)
9896872258

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