कविता · Reading time: 1 minute

” शिकायत “

सबको है मुझसे शिकायत ,
मैं किस से कहूं अपनी शिकायत ?
कोई तो हो जिसे मुझसे कोई ना हो शिकायत ।

किसी को सुप्रभात नहीं कहां तो ,
दर्ज हुई मेरी पहली शिकायत ।

किसी की शादी की वर्षगांठ भूल गई तो ,
दर्ज हुई मेरी अगली शिकायत ।

किसी के झूठ में साथ ना दिया तो ,
दर्ज हुई मेरी अगली शिकायत ।

किसी के साथ घूमने ना गई तो ,
दर्ज हुई मेरी अगली शिकायत ।

किसी के जन्मदिन पर ना दी बधाई तो ,
दर्ज हुई मेरी अगली शिकायत ।

किसी को रूपए ना दिए तो ,
दर्ज हुई मेरी अगली शिकायत ।

किसी की गलती पर उंगुली उठाई तो ,
अधर्मी मैं कहलाई ।
दर्ज हुई फिर मेरी अगली शिकायत ।।

किसी के घर ना जा पाई तो ,
घमंडी मैं कहलाई ।
दर्ज हुई फिर मेरी अगली शिकायत ।।

अपने हृदय की बात कही तो ,
मतलबी मैं कहलाई ।
दर्ज हुई फिर मेरी अगली शिकायत ।।

किसी को उपहार नहीं दिया तो ,
कंजूस मैं कहलाई ।
दर्ज हुई फिर मेरी अगली शिकायत ।।

सबकी है अपनी अपनी शिकायत ,
जिसे देखो उसे है मुझसे शिकायत ।
कब होगी ना जाने हमारी रिहायत ,
ना जाने कब खत्म होगी ये शिकायत ।।

🙏 धन्यवाद 🙏

✍️ ज्योति ✍️
नई दिल्ली

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