गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

शिकायत यहाँ हुजूर

ग़ज़ल

करते नहीं हैं’ लोग शिकायत यहाँ हुजूर
थोड़ी तो’ हो रही है’ मुसीबत यहाँ हुजूर

बिकने लगे हैं’ राज सरे आम आजकल
चमकी खबरनबीस की’ किस्मत यहाँ हुजूर

बिछती कहीं है’ खाट, कहीं टाट हैं बिछे
हो हर जगह रही है’ सियासत यहाँ हुजूर

पलते रहे हैं’ देश में जयचंद हर जगह
पहली नहीं है’ आज ये’ आफत यहाँ हुजूर

मिल तो गई जुगाड़ से’ कुर्सी बड़ी तुम्हें
मुश्किल मगर दिलों पे’ हुकूमत यहाँ हुजूर

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