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@शिकवे मिटाते है@

Vinita Vini

Vinita Vini

कविता

November 13, 2017

*शिकवे मिटाते है*

चलो आज कुछ खाव को हकीकत बनाते है,,
अपने हाथों से ही नये कुछ घरौंदे बनाते है,,

बहुत सह लिया जिलालत को जिंदगी में,,
अब कुछ इज्जत के पल बिताते हैं,,

नब्ज कोई टटोले इससे पहले की,,
खुद ही अपने सब हालत बताते है,,

मुशाफिर हम भी तुम भी राह के,,
चलो एक दूजे का साथ निभाते है,,

क्या जीना दूरियों को सहकर जीवन,,
अब तो विनी शिकवे मिटा गले लगाते ह,,
*विनीता मांडले 【विनी】*

Author
Vinita Vini
विनीता (विनी) घरेलू महिला एम ए हिन्दी, कविता लेखन,गायन,संवाद,राष्ट्र,बेटी,बचाओ पढाओ,स्थानीय काव्य आयोजनों,पत्रिकाओं में सम्मलित,मूल रूप से नरसिंगपुर निवासी,,,, सबरस लेखन,हिंदी साहित्य की सेवा,,,
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