शेर · Reading time: 1 minute

शायर

चाहत की तलाश मे ना जाने कँहा से चलकर आया हूँ मैं ,
हर एक इंसान को उसी की जुबान से सुनता आया हूँ मैं ,
सभी को अपना समझना एक तूजूर्बा था,
इन्ही तुजुर्बौ को सीखते हुये आज का शायर बन पाया हूँ मैं ।

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