कविता · Reading time: 1 minute

शायर दिल

आज दिल शायर है,
ख़्वाबों का परिंदा,
उम्मीदों से घायल है,
हर एक शह है उसकी,
आवारगी की क़ायल,
ग़म बना इक़ नगमा,
और दिल शायर है,
देख कर उसकी बेरुख़ी,
हमारा रूठ जाना भी,
जायज़ है,लौटेगा वो कभी,
यह सोचना भी शायद है
ग़म बना आज एक नगमा
और दिल शायर है,
ज़रूरत उसे नही गर हमारी,
तो हमें भी उससे,
क्या क़वायद है,
मिला उसे कोई और,
तो झाँकना उधर हमारा
यकींनन अब नाजायज़ है
ग़म है आज एक नग़मा
और दिल शायर है !

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