"शायरी"

“माँ”

तेरी यादों में मैं खोयी रहूं।।
तेरी यादों में मैं सोयी रहूं।।।
जब तू आये करीब मेरे,
तो मैं तेरे लिए जगती रहूं।।।।

तेरी यादों का सिलसिला,
जैसे पानी में कमल खिला।।।

हुस्न-ए-अदा बया करू में कैसे
चेहरा तेरा लगे मुझे ऐसे
संध्या की लाली हो जैसे।।।।

कुछ- कुछ अदा तुम्हारी भी हैं,
हमारी जैसी…
फिदा भी होते हो और मरते भी हो,
हमारे जैसे…

लबों पर खामोशी होती हैं…
और आखों में मोहब्बत होती हैं…
जब उनसे निगाहें मिलती हैं….
उस वक्त ये हालत होती हैं….

आप दुनिया भर से….
उल्फत कीजिए।।
मुझे बस मेरा दिल…
वापस कीजिए।।

क्यों डरे हम जिन्दगी में….
क्या होगा।।
कुछ भी ना होगा तो….
अनुभव तो होगा।।।।

क्या सुनाए किसी को हाल-ए-दिल का….
अपने ही दिल में रहे मलाल- ए-दिल का…

“धन्यवाद”

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