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शायरी

अजीत कुमार तलवार

अजीत कुमार तलवार "करूणाकर"

शेर

March 2, 2017

कभी आज तक न कोई
तोड़ के लाया है , आसमान से तारे
फिर क्यूं, ऐसे अरमान, तू
पाल लेता है , अपने सनम के लिए प्यारे
अजीत

माला का टूट के बिखर जाना,
प्यार के पलों का बिखर जाना
दिल पर लगी चोट का न उभर पाना
इंसान न जाने क्या क्या सोच कर
खुद को परेशां किया करता है
वो सच्ची मोहोब्बत नहीं थी,
क्यूं ? फिर यार घबराता है
अजीत

Author
अजीत कुमार तलवार
शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, पूर्वज : अमृतसर से है, और वर्तमान में मेरठ से हूँ, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , EMAIL : talwarajit3@gmail.com, talwarajeet19620302@gmail.com. Whatsapp and Contact Number ::: 7599235906
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