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शायरी

विनोद कुमार दवे

विनोद कुमार दवे

शेर

November 9, 2016

ये मौसम बदलता जा रहा है रंग अपना,
और वो अपनी बात पर कायम है।
सुबह आफ़ताब के आगोश में है,
जिद्दी है अँधेरा, रात पर कायम है।
*** ***
हर लम्हा उसके ख़्वाबों में कायनात बसर होती है,
रात ढलती तो है, पर कहाँ सहर होती है।
*** ***
उसकी आँखों में जो नफ़रत नज़र आती है,
उसके पीछे एक प्यार की प्यारी कहानी है।
ये दर्द की सलवटें जो चेहरे पर सजी है,
उसके नादान गुनाहों की निशानी है।
*** ***
उसने कहा था भूल जाने को,
अक्सर हमें वो ही बात याद आ जाती है।
*** ***
कौन कहता है डूब कर हार जाएंगे,
‘दवे’ ये मुहब्बत है, जितना गहरा डूबेंगे उतना प्यार पाएंगे।
*** **

Author
विनोद कुमार दवे
परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। 4 साझा संकलन प्रकाशित एवं 17 साझा संकलन प्रकाशन... Read more
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