शायरी

तुम्हारी दूरिओं से शिकवा नहीं करता
करता हूँ उस दूरी से बस जो इतना दूर
तुम को किये हुए है, पास आने नहीं देती
और दूर हम को जाने ही नहीं देती !!

हकीकत तो यही है, कि इंसान लाचार है
किसी न किसी के प्यार में वो बीमार है
याद करता और खुद जख्म भरता है
शायद इसी का नाम दोस्त प्यार है !!

अजीत

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