शायरी

वो कहते हैं,,हम से..कि भूल सको तो भूल जाओ
क्या भूलाने के लिए, तुम को इतना पास बुलाया था
भूलने की आदत नहीं रखता हूँ जिगर में ओ कहने वाले
उसी से तो आज जो खड़ा हुआ मैने महल बनाया था !!

तेरी दोस्ती पर मिटेंगे , न आंच आने देंगे तुम पर
बड़ी मुश्किलों के बाद मिला है तुम सा निभाने वाला
स्वार्थ पर चलते हैं वो जिन को काम है बस हवस का
मैने तो खुदा से साथ माँगा था, तुझ सा साथ चलने वाला !!

अजीत

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