Jan 27, 2020 · मुक्तक
Reading time: 1 minute

मुक्तक

1- हमने बुलंदी पे जाने की कसम खाई थी।
अपनों ने फलक से नीचे खींचने की कसम खाई थी।।

2- खामोश रहो तो सब है।
कह दो गर तो सब विलिन है।।

3- सारे खिड़की – दरवाजे बंद कर दो
झुठ की लगा दो पहरेदारी
छल – प्रपंच का बुन लो जाल
रुह को बहला लो फुसला लो
मगर
सच तो आॅक्सीजन है
दरारों – छिद्रों से चला ही आता है।

4- जो नजर से गिर जाते हैं
वो आंखों में सजते नहीं कभी।
जो नजर में सजते हैं
वो आंखों से बहते नहीं कभी।।

~रश्मि

3 Likes · 2 Comments · 150 Views
Kumari Rashmi
Kumari Rashmi
40 Posts · 3.6k Views
Follow 18 Followers
जब से लिखना आया तबसे लिखना शुरू की...... पर किसी ने बताया नहीं की लेखन... View full profile
You may also like: