शायद मेरे बच्चे अब बड़े हो रहे हैं..

मेरी बातों में..मेरे उसूलों में
मेरी सीख में..मेरे ज्ञान में
थोड़ी कमियाँ सी निकालने लगे हैं
शायद मेरे बच्चे अब बड़े हो रहे हैं

थोड़ी खुशी भी है..थोड़ा गुरुर भी
कभी कभी थोड़ा डर भी
मुझे अब बूढा कहने लगे हैं
शायद मेरे बच्चे अब बड़े हो रहे हैं

कभी मेरी मदद करते..कभी फ़टकार भी देते
कभी दोस्त बनते..कभी बच्चे बन जाते
ऊंचा कद वो रोज़ मुझसे अब मापने लगे हैं
शायद मेरे बच्चे अब बड़े हो रहे हैं

मुझे सीख देते कभी समझाते
दवा न लेने पर डाँट भी देते
चिंता वो मेरी अब करने लगे हैं
ख्याल भी मेरा रखने लगे हैं
शायद मेरे बच्चे अब बड़े हो रहे हैं

परछाई सी मेरी अब दिखने लगे हैं
बातों को मेरी दोहराने लगे हैं
दुनियांदारी शायद कुछ कुछ समझने लगे हैं
खुशियों की महफ़िल सज़ाने लगे हैं
शायद मेरे बच्चे अब बड़े हो रहे हैं…

स्वरचित: अनुजा कौशिक

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मैं एक प्रोफ़ेश्नल सोशल वर्कर हूं..ज़िन्दगी में होने वाले अनुभवों और अपने विचारों की अभिव्यक्ति...
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