शायद ! तुमने मुस्काया है. (नवगीत)

स्वच्छंद गगन ,
सुरभित है चमन,
शायद !
तुमने मुस्काया है ।

झरने का कल-कल,छल-छल ;
जैसे- लहराता हो आँचल ।
ये झंकृत होता मंद पवन ,
संगीत हुआ मेरा पल-पल ।
पल रहे गीत ,
गा रहे मीत ।
शायद !
तुमने मुस्काया है ।

मदमत्त हुए लतिका-किसलय ,
मानो सैनिक को मिली विजय ।
ये लहरों का आना-जाना ,
जैसे- नभ-क्षिति का हुआ प्रणय ।
चल रही हवा ,
गा रही फ़िजा ।
शायद !
तुमने मुस्काया है ।

गुंजित ये मधुकर-का मधु-रव,
पुष्पों को बहुत लुभाया है ।
मानो समय स्वयं चलकर ;
मृदु-राग सुनाने आया है ।
खिल रहे फूल ;
उड़ रही धूल ।
शायद !
तुमने मुस्काया है ।

ईश्वर दयाल गोस्वामी
कवि एवम् शिक्षक ।

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