.
Skip to content

शाम..।

ANURAG Singh Nagpure

ANURAG Singh Nagpure

कविता

April 9, 2017

कभी कभी शाम कुछ ऐसे कहीं होती है,

जैसे तुम्हारी याद आसमां में सितारे बोती है।

दूर कहीं से ख्यालों का कारवाँ चला आता है,

और एक चेहरा चाँद पर आकर ठहर जाता है।

ख्वाबों का परिंदा बड़ी बाज़ीगिरी करता है,

दूर आसमां में एक ऊँची परवाज़ भरता है।

लौट आते हो ज़हन मे जब सहर होती है,

ज़मी पर कहीं शबनम कहीं धुंध पड़ी होती है।

कभी कभी शाम कुछ ऐसे भी होती है,

कभी कभी रात कुछ ऐसे भी गुज़रती है।

~अनुराग©

Author
Recommended Posts
कभी कभी शाम कुछ ....
कभी कभी शाम कुछ ऐसे कहीं होती है, जैसे तुम्हारी याद आसमां में सितारे बोती है। दूर कहीं से ख्यालों का कारवाँ चला आता है,... Read more
शाम की कहानी
रात दिन का जिक्र रहा, गुमनाम रह गई शाम आशिकों ने दामन थामा, लम्हों में बीत गई शाम सुरमई सी कल्पना रही , अंत-उदय में... Read more
ग़ज़ल : दिल में आता कभी-कभी
दिल में आता कभी-कभी जग न भाता कभी-कभी । दिल में आता कभी-कभी ।। देख छल-कपट बे-शर्मी,, मन तो रोता कभी-कभी ।। आकर फँसा जहाँ--तहाँ,,... Read more
चलो फटे  में टाँग अड़ाएँ
यार चलो नेता बन जाएँ और फटे में टाँग अड़ाएँ शेयर जैसे सुबह उछलकर, लुढ़क शाम को नीचे आएँ जंतर मंतर पर जा बैठें, मूंगफली... Read more