शान मान और अभिमान हैं पापा

[ 28/08/2020]
*छन्द मुक्त, कविता*
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शान मान और अभिमान हैं पापा ।
मेरे जीवन की पहचान हैं पापा ।
पापा है तो हर सपने अपने,
हर मुश्किल का आसान हैं पापा।
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जर ज़मीन ज़ागीर हैं पापा ।
ईश्वर का ही एक रूप हैं पापा ।
आपका ये कर्ज चुका सकते नहीं,
इतने हम पर तेरे उपकार हैं पापा ।
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मेरी हर समस्या का समाधान हैं पापा ।
हर शौक जो पूरी कर दे वो आप हैं पापा ।
जिनकी साया में रहते हम निडर है,
उस वट वृक्ष की छांव हैं पापा ।
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माँ का सिंदूर बेटी की आस हैं पापा ।
मेरी हिम्मत और उमंग हैं पापा ।
जिसपे पूरा परिवार टिका,
उस घर का विश्वास हैं पापा ।
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जो हर कष्ट सहकर भी खामोश रहते इतने महान हैं पापा ।
कभी हारा थका न खुद को समझे ऐसे तो इन्सान हैं पापा ।
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स्वरचित:-
अभिनव मिश्रा✍️✍️
(शाहजहांपुर )

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