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** शादी के बाद **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

February 19, 2017

आ रहा था एक युवक
हट्टा कट्टा मुस्डण्डा सा
मूछों पर ताव लगाते हुए
पर मूछें उसके नहीं थी
अँगुलियों का दाब
लगाते हुए आ रहा था
मै डॉक्टर था वो मरीज
पर मुझे लग रहा था कि
है वो मेरा कोई करीब
देखा मैने उसे —
ठीक था बिल्कुल वो
मैने कहा – यहाँ हट्टो कट्टो
का कुछ काम नहीं
सिर्फ मरीजों का काम यहीं
जाओ किसी अखाड़े में
है वहीं तुम्हारी ताकत
का दाम सही
उसने कहा —–
मै मरीज नहीं न ही पहलवान
मै तो सिर्फ तुम्हारा दोस्त हूँ
मै स्याम हूँ मुझे राधा से
कोई शिकायत नहीं
मै शादीशुदा हूँ पर मुझे
कुंवारों से कोई शिकायत नहीं
करवादो ! समझौता उनसे
मैने कहा किनसे
उसने कहा उनसे
जिनकी देखी थी मैने सैंडल
चेहरा देखने से पहले
देखा था हाथ में बेलन
हाथ लगाने से पहले
जबसे हुई है शादी
मै फुट फुट के रोया हूँ
बीबी के बेलन के डर से
दिनरात नहीं मै सोया हूँ
देदो दो चार नींद की गोलियां
कुछ तो थकान कम हो मेरी
बैलन , सैंडल के भय का भार
कुछ तो कम हो मेरा
मैने कहा — ले जाओ डिब्बा
जब जब बैलन आये नज़र
डाल मुँह में ये गोली
बेखबर हो सो जाना प्यारे ।।
?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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