शहीद की बहन और राखी

मेरे प्यारे भैय्या, आपने मेरी राखी की लाज निभाई ,
“माँ भारती” की सीमाओं की रक्षा करते जान गवांई I

इस वर्ष आप नहीं लेकिन आपकी यादें हमारे साथ ,
बहना के सिर पर प्यार-आशीर्वाद देते आपके हाथ ,
मिठाई खुद न खाकर हमको खिलाते आपके हाथ,
गट्ठा बाबूजी से छीनकर अपने सिर पर रखते हाथ I

मेरे प्यारे भैय्या, आपने मेरी राखी की लाज निभाई ,
“माँ भारती” की सीमाओं की रक्षा करते जान गवांई I

स्कूल जाते समय मेरा बस्ता भी खुद ले लेते थे,
पोटली से अपना खाना भी हमको खिला देते थे,
“माँ” की डांट से रोती थी, तो हमें हँसा भी देते थे ,
बरसात की टप-2 में खुद जागकर हमें सुला देते थे I

मेरे प्यारे भैय्या, आपने मेरी राखी की लाज निभाई ,
“माँ भारती” की सीमाओं की रक्षा करते जान गवांई I

बहन का सन्देश :
बहन-बेटी की आबरू की रक्षा का संकल्प लें भारत के लाल ,
सीमा पर जिस तरह सीमाओं की रक्षा करतें हमारे वीर जवान ,
मेरे भैय्या को यह ही सच्ची श्रधांजलि होगी एवं उनका सम्मान ,
देश की बहन-बेटी सुरक्षित होंगी तभी बनेगा “मेरा भारत महान” I

मेरे प्यारे भैय्या, आपने मेरी राखी की लाज निभाई ,
“माँ भारती” की सीमाओं की रक्षा करते जान गवांई I

उपरोक्त पंक्तियां शहीद जवानों की बहनों को समर्पित है , शहीद वीर जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा करते अपने प्राणों की आहुति दी I

देशराज “राज”

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